
राजस्थान के अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में जन्नती दरवाजा खोला गया। यूपी, बंगाल दिल्ली में पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स फ्लैग मार्च कर रही है। मस्जिदों और ईदगाहों पर ड्रोन के जरिए निगरानी रखी जा रही है।
उत्तराखंड, चंडीगढ़ की मस्जिदों और ईदगाहों में इस बार नमाजी पोस्टर लेकर पहुंचे। जिन पर लिखा था- गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करें।
ईद-उल-अजहा या बकरीद को ‘बलिदान का त्योहार’ भी कहा जाता है। यह इस्लामी हिजरी कैलेंडर के 12वें महीने, धू अल-हिज्जा के 10वें दिन मनाया जाता है। यह मक्का में होने वाली सालाना हज यात्रा के समापन का प्रतीक है।
बकरीद की तारीख हर साल बदलती रहती है क्योंकि यह चंद्र कैलेंडर पर आधारित होता है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर से लगभग 11 दिन छोटा होता है। इसका नतीजा यह होता है कि पश्चिमी कैलेंडर में ईद हर साल थोड़ा पहले आ जाती है।
