बलौदाबाजार, 21 सितंबर 2026। बलौदाबाजार वनमंडल अंतर्गत बलौदाबाजार वन परिक्षेत्र में वन विभाग की टीम वन संरक्षण के साथ-साथ वन्यजीवों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार सक्रिय है। घर, विद्यालय, खेत अथवा आबादी वाले क्षेत्र में सर्प या अन्य वन्यजीव दिखाई देने की सूचना मिलते ही विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर सुरक्षित रेस्क्यू की कार्रवाई कर रही है।
वर्ष 2026 के दौरान बलौदाबाजार वन परिक्षेत्र की टीम द्वारा विभिन्न ग्रामों एवं शहरी क्षेत्रों से करीब 250 सर्पों का सफल रेस्क्यू किया गया है। इनमें कॉमन करैत, रसेल वाइपर, कोबरा सहित विभिन्न विषैले सर्पों के साथ बड़ी संख्या में गैर-विषैले सर्प भी शामिल हैं। रेस्क्यू के बाद सर्पों को उनके प्राकृतिक एवं सुरक्षित आवास वाले वन क्षेत्रों में छोड़ा गया।
घायल बंदरों का भी किया गया रेस्क्यू
वन विभाग की टीम ने सर्प रेस्क्यू के साथ-साथ विभिन्न स्थानों से मिली सूचनाओं पर घायल बंदरों का भी सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। घायल वन्यजीवों को सुरक्षित निकालकर आवश्यक उपचार एवं देखभाल की व्यवस्था की गई और उनकी स्थिति के अनुसार सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
देर रात भी मौके पर पहुंची टीम
जीएडी कॉलोनी, कृष्णायान कॉलोनी, लक्ष्मण विहार कॉलोनी, श्रीकृष्णा सिटी सहित बलौदाबाजार नगर के विभिन्न वार्डों और लगभग सभी ग्रामों से सर्प दिखाई देने की सूचनाएं वन विभाग को प्राप्त होती रही हैं। कई बार देर रात सूचना मिलने पर भी टीम तत्काल मौके पर पहुंची।
एसडीओ बलौदाबाजार के मार्गदर्शन में परिक्षेत्र अधिकारी एवं वन अमले ने सीमित संसाधनों तथा प्रशिक्षित कर्मचारियों की मदद से कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सुरक्षित सर्प रेस्क्यू अभियान चलाया। इससे संभावित जनहानि को टालने के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हुई।
70 से 80 प्रतिभागियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण
सर्प रेस्क्यू को और अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी बनाने के लिए बलौदाबाजार वनमंडल कार्यालय में विशेष प्रशिक्षण का आयोजन भी किया गया। इसमें वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय स्वयंसेवकों सहित करीब 70 से 80 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
प्रशिक्षण में विषैले एवं गैर-विषैले सर्पों की पहचान, सुरक्षित रेस्क्यू की वैज्ञानिक तकनीक, सुरक्षा उपकरणों के उपयोग, प्राथमिक सावधानियों तथा रेस्क्यू के बाद सर्पों को प्राकृतिक आवास में छोड़ने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
वन्यजीव दिखे तो खुद जोखिम न उठाएं
वन विभाग की इस त्वरित और संवेदनशील कार्यप्रणाली से नागरिकों में जागरूकता और विश्वास बढ़ा है। अब लोग सर्प या अन्य वन्यजीव दिखाई देने पर स्वयं जोखिम उठाने के बजाय वन विभाग को सूचना देने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करने में मदद मिल रही है।
चाणक्य न्यूज़ इंडिया
हिमांशु शुक्ला
बलौदा बाजार-भाटापारा
विशेष संवाददाता
